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सेहत और तन्द्रुस्थी – सारान्श

सेहत होता क्या हैं - कैसे बयान करें

हम सभी इसके बारेम परेशन रहते हैं – ‘सेहत’. आख़िर सेहत होता क्या हैं और इसे कैसे बयान करें? आइए थोड़ी सी नज़र इसमे डाल ते हैं.

सेहत की परिभाषा

1948 मैं वर्ल्ड हेल्त ऑर्गनाइज़ेशन ने कहा के “दैहिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णता: स्वस्थ होना (समस्या-बिहीन होना). कुछ लोग सेहत की इस परिभाषा से इत्तेफ़ाक़ रखते होंगे. लेकिन सेहतमंद होने की कुछ बिसेश्ते हैं जो पूरी दुनिया मानता हैं : –

  • अगर अप सेहतमंद हो, तो उसका मतलब यह है के अब आप शारीरिक और मानसिक तौर पर अच्च्ची तरह से जी रहे हो. और ऐसी परिस्थिति आप उमर भर बरकरार रख पाओगे.
  • आपमे कोई भी रोग नहीं हैं – सिर्फ़ इसका मतलब यह नहीं बनता के आप सेहतमंद हो. आपके पास ऐसी काबिलियत भी होने चाहिए के आप किसी भी तरह के रोग और तकलीफ़ से उभर सको.
  • सेहत जुड़े होते हैं आपके पुरखों के गुण से, प्रकृति और वातावरण वहाँ के जहाँ आप रहते हो, आप कटने लोगों से और कैसे लोगों से जुड़े हुए हो और सिक्षा के साथ.
  • अच्च्ची गुण वाली आहार, थोड़ी सी व्यायाम, नियमित शारीरिक जाँच और अनुकूल जीवन शैली आपको ज़िंदगी भर के लिए सेहतमंद रख सकते हैं.

अब देखिए किंवदंती लोगों ने सेहत को किस तरह से देखते हैं.

स्वस्थ का उल्लेख किन्वदन्तीओ की

"स्वस्थ सबसे बड़ा उपहार हैं, संतोष सबसे बड़ा धन हैं, वफ़ादारी सबसे बड़ा संबंध हैं."
गौतम बुद्ध
ऋषि
"हर मनुष्य अपने स्वस्थ का खुद ही लेखक होता हैं."
गौतम बुद्ध
ऋषि
"जल्दी सोना और जल्दी उठना एक आदमी को स्वस्थ, संपन्न और बुद्धिमान बना देता हैं."
बेंजामिन फ्रॅंक्लिन
अमरीका के एक संस्थापक
"अपने शरीर की देखभाल करो. यहीं वो जगह हैं जहाँ तुम्हे रहना हैं."
जिम रोह्न
अमरीकी प्रेरक वक्ता
"हमारे शरीर बागीचों की तरह हैं - हमारे संकल्प माली की तरह हैं."
विलियम शेक्स्पियर
अँग्रेज़ी के महानतम लेखक
"यह स्वस्थ हैं जो सच्ची दौलत हैं, सोने और चाँदी के टुकड़े नहीं."
महात्मा गाँधी
अहिंसक नेता और कार्यकर्ता
"सबसे बड़ा धन स्वस्थ हैं."
वीरगिल
प्राचीन रोमन लेखक
"आपका शरीर मंदिर की तरह हैं, पर तभी जब आप इसके साथ उसी तरह से पेश आते हैं."
आस्टरिड अलौदा
लेखक

सेहत के वर्ग

दो तरह के सेहत होते हैं – शारीरिक सेहत और मानसिक सेहत.

शारीरिक सेहत

आपका शारीरिक स्वास्थ्या का मतलब हैं आपका तन पूरी तरहा से काम कर रहा हैं और उसका प्रदर्शन बहुत ही उत्तम हैं. आपको किसी भी प्रकार का रोग नहीं हैं. आप नियमित अपने शरीर का नैदानिक तरीके से जाँच करवाते हैं ताके हमेशा ऐसे उत्तम तरीके से जीते रहो. आप हमेशा स्वस्थ खाना खाते हैं और एक स्वस्थ आहार सूची का पालन करते हैं. आप अपने खाने के बारेमे हमेशा ध्यान रखते हैं और कभी भी उल्टा-पुल्टा खाना नहीं खाते हैं. और आप खाने का सामान खरेद ने से पहले हमेशा सुगर, चर्बी और कॅलरी क मात्रा जाँच कर के देखते हैं. आप नियमित व्यायाम भी करते हैं अपने आपक को स्वस्थ और चंगा रखने के लिए. जैसे के थोड़ी सी पुश-उपस और उतक-बैठक, थोड़ी दूर तक दौड़ना और योगा भी करना ताके आप हमेशा स्वस्थ आकार मे रह सकें. आप तंबाकू से जुड़े हुए प्रॉडक्ट्स को हमेशा दूर ही रखते हैं जो के आपको हानि पहुँचा सकता हैं. आप अवैध दवाओं का इस्तेमाल नहीं करते हैं; बहुत ही कम आप शराब को हाथ लगते हैं; स्वच्च्छता का आप पूरा ध्यान रखते हैं.

मानसिक सेहत

Mental Health

जब भी हम लोग सुनते हैं ‘मानसिक सेहत’ के बरमे, तो यही लगता हैं के यह ‘पागलपन’ से जुड़ा हुआ हैं. अगर कोई किसी के बरमे ऐसा कहता हैं के ‘वो तो मेंटल हैं’ – तब हम लोग उससे पागलपन या मानसिक रोग का शिकार हैं. यह मेंटल या मानसिक शब्द ने आम लोगों के उपर कुछ हद तक बुरे तरीके से प्रभब डाला हैं. लेकिन इसकी प्रभब बहुत दूर तक जाते हैं.

मानसिक सेहत इंसान के भाबना और मनोवयगञयानिक पहलू से जुड़े हुए हैं. हम क्या और कैसे सोंछते और महसूस करते हैं, और यह सब हमारे रोज़ की ज़िंदगी मैं हमे क्या क्या करवाता हैं – यह सब मानसिक सेहत के साथ जुड़े हुए हैं. हम अपने परिवार, दोस्तों और दूसरे लोगों के साथ कैसे पेश आते हैं, ज़िंदगी के हर मोड़ पे! और मानसिक सेहत निर्भर करता हैं आनुवांशिकता, परवरिश, अनुभव जैसे के आघात, तनाव वगेरा के उपर.

अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुने तो मानसिक सेहत हैं “सलामती की एक स्थिति है जिसमे किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओ का एहसास रहता हैं, वो जीवन के सामान्य तनाव का सामना कर सकता हैं, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता हैं और अपने समाज के प्रति योगदान करने मैं सक्षम होता हैं.”

आप मानसिक सेहत के साथ खुशी, सकारात्मक सोंच और रवैया जैसे बातों को जोड़ सकते हैं. और ऐसे ही हम काई तरह के मानसिक अवस्था की पहचान कुछ संकेतों से समझ सकते हैं.

सेहतमंद और बीमारू मानसिकताए

किसिका भी मानसिक तौर पे स्वस्थ होने का मतलब हैं के वो : –

– सीखने मैं और उस हिसाब से काम करने मैं सक्षम हैं
– अपने भाबनाओ को अनुभव और व्यक्त कर सकता हैं.
– तनाव को संभाल सकता हैं
– अपने ज़िंदगी मैं उत्तम तरीके से काम कर सकता हैं
– अपने ज़िंदगी की पूरी संभनो से वाकिफ़ हैं.
– दूसरे लोगों के साथ अच्च्ची तरह से पेश आता हैं.
– आत्मा-नियंत्रण, धेरया और सहनशीलता जैसे गन हो.
इत्यादि.

और अगर किसिके बरमे यह कहाँ जाए के वो मानसिक तौर पर बीमार है, तो उसका मतलब है : –

– हमेशा भ्रमित रहता हैं.
– छ्होटी छ्होटी बात पर गुस्सा, दुख या खुशी ज़ाहिर करता हैं.
– हमेश संकट मैं रहता हैं, ज़्यादा बदलाव नज़र नहीं आता.
– ज़्यादातर चिंतित या डरा हुआ रहता हैं
– अकेला रहना उसे अच्च्छा लगता हैं, लोगों के साथ मिलना-जुलना पसंद नही.
– बहुत ज़्यादा या बहुत कम खाना और सोना.
– व्यवहार और मनोदशा मे अचानक परिवर्तन
– भ्रांत और भ्रमित रहना
– अपने परिवार और दोस्तों के साथ बेवजह गुस्सा करना

यह सारे लक्षण से किसी भी इंसान के मानसिक अवस्था का पहचान करवा सकता हैं. और ऐसे कंडीशन मैं किसिको भी छ्चोड़ के रखना उसके आनेवाले ज़िंदगी के साथ खेलने जैसा हैं. उसे जल्द ही किसी मनोवयगञयानिक के पास ले के जाना चाहिए.

फिटनेस या तन्द्रुस्थि क्या होता हैं

fitness flexibility

फिटनेस आख़िर क्या हैं? इसका संकल्पना तो बहुत ही बड़ा हैं. कोई इसे एक वाक़्या मैं समझा नही सकता. फिटनेस का मतलब फिट यानी चंगा रहना – शारीरिक और दिमागी दोनो तौर पे. आप अगर फिट हो तो आप अपना रोज़ के ज़िंदगी मैं अपना काम कुशलता और प्रभबी तौर पे कर सकते हैं, बिना कोई परिशानी के. आप दिमागी तौर पे बिल्कुल तन्द्रुस्थ हो और आपकी इच्च्छाशक्ति किसी भी बढ़ा को पार करने मैं सक्षम हैं. आप खेल-कूद और व्यायाम भी अच्च्ची तरह से कर लेते हैं.

बहुत सारी तत्व निर्धारित करते हैं के आप फिट या तन्द्रुस्थ हो के नही. यह सब हैं : –

– हृदय वाली सेहत : आप कितने शारीरिक गाठीबिधिया मे समिल हो सकते हैं और कितने लंबे वक़्त तक आप व्यायाम कर सकते हैं, बिना थके हुए. यह सारे चीज़ आपके हार्ट वाली स्वास्थ्या को दर्शाता हैं.

– शारीरिक रचना : आपका शरीर का उँचाई के हिसाब से वज़न का आँकड़ा, मांसपेशियो का बढ़ना, हद्देव का घनटवा और शक्ति, शरीर मैं चर्बी का वितरण , त्वचा का सेहत यह सब कारकों से आपका शरीरक रचना को दर्शाता हैं.

– संपूर्णा मांसपेशियों की ताक़त और सहनशीलता : यह तय होगा आपके शरीर का पूरा मांसपेशियों की ताक़त जैसे के वो कितना वज़न उठा सकता हैं, कितना दर्द वो झेल सकता हैं बिना थकान के.

– लचीलापन : आपके शरीर हद्डीोन का जोड़ और मांसपेशियों का खींचाव कितने हद तक उत्पन्न कर सकता हैं, जब आप चल रहे हैं? इसे लचीलापन कहते हैं. यह आपके खेल-कूद वेल करियर के लिए बेहत ही ज़रूरी हैं.

– गति : आपक कितनी जल्दी चल या दौड़ सकते हैं, आपके शरीर का बीविन्ना अंगा कितनी जल्दी कोई काम निपटा सकता हैं – यह सब तटवा आपका शरीर का गति निर्धारित करता हैं.

– संतुलन : आप अपने शरीर को कितना दूर तक नियंत्रण कर सकते हैं? इसमे आपका दिमाग़ भी नियंत्रण मे रहना चाहिए ताकि आप अगर बहुत जल्दी मूव कर रहे हो तो आप अपना शारीरिक संतुलन ना बिगाड़ दे.

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